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mahabharat 12.329.48-49: ज्ञान सम्बन्धी सभी बातें परम्परा से जाननी चाहिए। जो बातें इन्द्रियों द्वारा देखी जाती हैं, उन्हें व्यक्त कहते हैं और जो इन्द्रियों से अदृश्य होने के कारण अनुमान से जानी जाती हैं, उन्हें अव्यक्त कहते हैं ॥48-49॥   |   mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  12.329.48-49 
पारम्पर्येण बोद्धव्यं ज्ञानानां यच्च किञ्चन॥ ४८॥
इन्द्रियैर्गृह्यते यद् यत् तत् तद् व्यक्तमिति स्थिति:।
अव्यक्तमिति विज्ञेयं लिङ्गग्राह्यमतीन्द्रियम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
ज्ञान सम्बन्धी सभी बातें परम्परा से जाननी चाहिए। जो बातें इन्द्रियों द्वारा देखी जाती हैं, उन्हें व्यक्त कहते हैं और जो इन्द्रियों से अदृश्य होने के कारण अनुमान से जानी जाती हैं, उन्हें अव्यक्त कहते हैं ॥48-49॥
 
All the things related to knowledge should be known through tradition. The things which are perceived by the senses are called manifest and those which are known by inference because they are invisible to the senses are called unmanifest. ॥ 48-49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)