Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.329.4: हे भरतनन्दन! नारदजी के ये वचन सुनकर शुकदेवजी बोले - 'कृपा करके मुझे इस लोक में परम कल्याण का साधन बताइए।'॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.329.4 
नारदस्य वच: श्रुत्वा शुक: प्रोवाच भारत।
अस्मिँल्लोके हितं यत् स्यात् तेन मां योक्तुमर्हसि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! नारदजी के ये वचन सुनकर शुकदेवजी बोले - 'कृपा करके मुझे इस लोक में परम कल्याण का साधन बताइए।'॥4॥
 
O Bharatanandan! On hearing these words of Naradji, Shukdev said, 'Kindly teach me the means of ultimate welfare in this world.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)