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mahabharat 12.329.36: विद्या, कर्म, पवित्रता और अत्यंत विस्तृत ज्ञान का उपयोग धन (परमात्मा) प्राप्ति के लिए किया जाता है। जब कार्य सिद्ध हो जाता है (परमात्मा की प्राप्ति हो जाती है), तब मनुष्य मुक्त हो जाता है ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.329.36 
विद्या कर्म च शौचं च ज्ञानं च बहुविस्तरम्।
अर्थार्थमनुसार्यन्ते सिद्धार्थश्च विमुच्यते॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
विद्या, कर्म, पवित्रता और अत्यंत विस्तृत ज्ञान का उपयोग धन (परमात्मा) प्राप्ति के लिए किया जाता है। जब कार्य सिद्ध हो जाता है (परमात्मा की प्राप्ति हो जाती है), तब मनुष्य मुक्त हो जाता है ॥ 36॥
 
Education, work, purity and very detailed knowledge are used to attain wealth (God). When the task is accomplished (attainment of God), then the man becomes free. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)