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mahabharat 12.329.32: इस संसार में कुटुम्ब, स्त्री, पुत्र, शरीर और सम्पत्ति - सब कुछ दूसरे का है। सब कुछ नाशवान है। इसमें अपना क्या है, केवल पाप और पुण्य ही हैं॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.329.32 
कुटुम्बं पुत्रदारांश्च शरीरं संचयाश्च ये।
पारक्यमध्रुवं सर्वं किं स्वं सुकृतदुष्कृतम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में कुटुम्ब, स्त्री, पुत्र, शरीर और सम्पत्ति - सब कुछ दूसरे का है। सब कुछ नाशवान है। इसमें अपना क्या है, केवल पाप और पुण्य ही हैं॥ 32॥
 
In this world, family, wife, son, body and possessions - everything belongs to someone else. Everything is perishable. What is ours in this, only sin and virtue.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)