Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.329.31: जैसे मछलियाँ बड़े जाल में फँसकर जल से बाहर खींची जाने पर संघर्ष करती हैं, वैसे ही इन जीवों को देखो, जो प्रेम के जाल से आकर्षित होकर बहुत कष्ट उठा रहे हैं ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे मछलियाँ बड़े जाल में फँसकर जल से बाहर खींची जाने पर संघर्ष करती हैं, वैसे ही इन जीवों को देखो, जो प्रेम के जाल से आकर्षित होकर बहुत कष्ट उठा रहे हैं ॥31॥
Just as fishes struggle when they are caught in a huge net and are pulled out of water, similarly, look at these creatures who are attracted by the net of love and are suffering a lot. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥