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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.329.3 
नारदोथाब्रवीत् प्रीतो ब्रूहि धर्मभृतां वर।
केन त्वां श्रेयसा वत्स योजयामीति हृष्टवत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उस समय नारद जी प्रसन्न होकर बोले, ‘पुत्र! तुम पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ हो। बताओ, मैं तुम्हें कौन-सी महान् वस्तु दिलवाऊँ?’ उन्होंने बड़े हर्ष के साथ ऐसा कहा।
 
At that time Narada became happy and said, 'Son! You are the best among the virtuous people. Tell me, what great thing should I help you get?' He said this with great joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)