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mahabharat 12.329.18: किसी भी प्राणी को कष्ट न पहुँचाओ। सबके प्रति मैत्रीभाव रखो और मनुष्य जन्म पाकर किसी से भी बैर न रखो।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.329.18 
न हिंस्यात् सर्वभूतानि मैत्रायणगतश्चरेत्।
नेदं जन्म समासाद्य वैरं कुर्वीत केनचित्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
किसी भी प्राणी को कष्ट न पहुँचाओ। सबके प्रति मैत्रीभाव रखो और मनुष्य जन्म पाकर किसी से भी बैर न रखो।॥18॥
 
Do not harm any living creature. Be friendly towards all and do not bear enmity towards anyone after being born as a human being.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)