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mahabharat 12.329.17: हे मुनि! जो किसी प्राणी को नहीं देखता, किसी को स्पर्श नहीं करता और किसी से बात नहीं करता, वह परम कल्याण को प्राप्त होता है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.329.17 
अदर्शनमसंस्पर्शस्तथासम्भाषणं सदा।
यस्य भूतै: सह मुने स श्रेयो विन्दते परम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे मुनि! जो किसी प्राणी को नहीं देखता, किसी को स्पर्श नहीं करता और किसी से बात नहीं करता, वह परम कल्याण को प्राप्त होता है॥17॥
 
O sage! He who does not look at any living being, who does not touch anyone, and who does not talk to anyone, attains the highest welfare. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)