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mahabharat 12.329.14: जिसने कार्यारम्भ करने का सम्पूर्ण विचार त्याग दिया है, जिसके मन में कोई कामना नहीं है, जो किसी वस्तु का संग्रह नहीं करता और जिसने सब कुछ त्याग दिया है, वही विद्वान् और विद्वान् है ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.329.14 
सर्वारम्भपरित्यागी निराशीर्निष्परिग्रह:।
येन सर्वं परित्यक्तं स विद्वान् स च पण्डित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जिसने कार्यारम्भ करने का सम्पूर्ण विचार त्याग दिया है, जिसके मन में कोई कामना नहीं है, जो किसी वस्तु का संग्रह नहीं करता और जिसने सब कुछ त्याग दिया है, वही विद्वान् और विद्वान् है ॥14॥
 
He who has given up all thoughts of starting a task, who has no desires in his mind, who does not accumulate any object, and who has renounced everything, he is the learned and the scholar. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)