Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.329.12: क्रूर स्वभाव का त्याग करना ही सबसे बड़ा धर्म है। क्षमा ही सबसे बड़ा बल है। आत्मा का ज्ञान ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान है और सत्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 12.329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  12.329.12 
आनृशंस्यं परो धर्म: क्षमा च परमं बलम्।
आत्मज्ञानं परं ज्ञानं न सत्याद् विद्यते परम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
क्रूर स्वभाव का त्याग करना ही सबसे बड़ा धर्म है। क्षमा ही सबसे बड़ा बल है। आत्मा का ज्ञान ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान है और सत्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है।॥12॥
 
Giving up cruel nature is the greatest religion. Forgiveness is the greatest strength. Knowledge of the soul is the best knowledge and there is nothing greater than truth.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)