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mahabharat 12.327.51-52h: जो धर्म के नियमों का उल्लंघन करके प्रश्न पूछता है और जो अधर्मपूर्वक उसका उत्तर देता है, वह या तो मर जाता है या दूसरे के द्वेष का पात्र बन जाता है ॥51 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  12.327.51-52h 
यश्चाधर्मेण विब्रूयाद् यश्चाधर्मेण पृच्छति॥ ५१॥
तयोरन्यतर: प्रैति विद्वेषं चाधिगच्छति।
 
 
अनुवाद
जो धर्म के नियमों का उल्लंघन करके प्रश्न पूछता है और जो अधर्मपूर्वक उसका उत्तर देता है, वह या तो मर जाता है या दूसरे के द्वेष का पात्र बन जाता है ॥51 1/2॥
 
'One who asks a question in violation of religious rules and one who answers it in an unrighteous manner, either dies or becomes the object of the other's hatred. ॥ 51 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)