Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.327.43-44h: शिष्यो! जो ब्रह्मलोक में स्थायी रूप से निवास करना चाहता है, उसका कर्तव्य है कि जो भी ब्राह्मण अध्ययन की इच्छा से आये, उसे सदैव वेद पढ़ाये। ॥43 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मणाय सदा देयं ब्रह्म शुश्रूषवे तथा॥ ४३॥
ब्रह्मलोके निवासं यो ध्रुवं समभिकाङ्क्षते।
अनुवाद
शिष्यो! जो ब्रह्मलोक में स्थायी रूप से निवास करना चाहता है, उसका कर्तव्य है कि जो भी ब्राह्मण अध्ययन की इच्छा से आये, उसे सदैव वेद पढ़ाये। ॥43 1/2॥
'Disciples! It is the duty of one who wishes to reside permanently in Brahmaloka to always teach the Vedas to any Brahmin who comes with the desire to study. ॥ 43 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥