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mahabharat 12.327.41: हम चार आपके शिष्य हैं और पाँचवाँ शिष्य गुरुपुत्र शुकदेव हैं। आपके द्वारा उपदेशित समस्त वेद इन्हीं पाँचों में स्थापित हों, यही हमारे लिए अभीष्ट वर है॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 12.327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.327.41 
चत्वारस्ते वयं शिष्या गुरुपुत्रश्च पञ्चम:।
इह वेदा: प्रतिष्ठेरन्नेष न: कांक्षितो वर:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हम चार आपके शिष्य हैं और पाँचवाँ शिष्य गुरुपुत्र शुकदेव हैं। आपके द्वारा उपदेशित समस्त वेद इन्हीं पाँचों में स्थापित हों, यही हमारे लिए अभीष्ट वर है॥ 41॥
 
'We four are your disciples and the fifth disciple is Guru's son Shukdev. May all the Vedas taught by you be established in these five only; this is the desired boon for us.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)