Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.327.4-6: उस पर्वत पर अप्सराएँ विचरण कर रही थीं। वह सम्पूर्ण क्षेत्र नाना प्रकार के प्राणियों की शान्त ध्वनि से गूंज रहा था। हजारों किन्नर, भ्रमर, मद्गु, विचित्र खंजरित, चकोर, विभिन्न रंगों के सैकड़ों मधुर स्वर वाले मोर, हंसों के झुंड और काली कोयलें वहाँ अपनी शान्त मधुर ध्वनियाँ बिखेर रही थीं। | mahabharat अध्याय 12.327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस पर्वत पर अप्सराएँ विचरण कर रही थीं। वह सम्पूर्ण क्षेत्र नाना प्रकार के प्राणियों की शान्त ध्वनि से गूंज रहा था। हजारों किन्नर, भ्रमर, मद्गु, विचित्र खंजरित, चकोर, विभिन्न रंगों के सैकड़ों मधुर स्वर वाले मोर, हंसों के झुंड और काली कोयलें वहाँ अपनी शान्त मधुर ध्वनियाँ बिखेर रही थीं।
Apsaras were roaming around on that mountain. The entire region was filled with the peaceful sounds of various creatures. Thousands of Kinnars, Bhramar, Madgu, strange Khanjarits, Chakors, hundreds of sweet-voiced peacocks of different colors, flocks of swans and black cuckoos were spreading their peaceful sweet sounds there. 4-6.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥