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श्लोक  12.327.32 
ततो निवेदयामास पित्रे सर्वमशेषत:।
शुको जनकराजेन संवादं प्रीतमानस:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शुकदेव ने प्रसन्नतापूर्वक अपने पिता को राजा जनक के साथ हुई बातचीत का पूरा वृत्तांत सुनाया।
 
Thereafter Shuka, filled with joy, narrated to his father the entire story of his conversation with King Janaka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)