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mahabharat 12.327.31: पास आकर, अरणि के पुत्र, महान ऋषि शुकदेव ने अपने पिता के दोनों पैर पकड़ लिए और शांतिपूर्वक अपने सभी अन्य शिष्यों से भी मिले।   |   mahabharat अध्याय 12.327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.327.31 
सोऽभिगम्य पितु: पादावगृह्णादरणीसुत:।
यथोपजोषं तैश्चापि समागच्छन्महामुनि:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
पास आकर, अरणि के पुत्र, महान ऋषि शुकदेव ने अपने पिता के दोनों पैर पकड़ लिए और शांतिपूर्वक अपने सभी अन्य शिष्यों से भी मिले।
 
Coming close, the great sage Sukadev, the son of Arani, held both the feet of his father and calmly met all his other disciples too.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)