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mahabharat 12.327.23: वह दस योजन चौड़ा शिखर अग्नि की ज्वालाओं से घिरा हुआ है। वहाँ स्वयं महाबली अग्निदेव विराजमान हैं॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.327.23 
दशयोजनविस्तारमग्निज्वालासमावृतम्।
भगवान् पावकस्तत्र स्वयं तिष्ठति वीर्यवान्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वह दस योजन चौड़ा शिखर अग्नि की ज्वालाओं से घिरा हुआ है। वहाँ स्वयं महाबली अग्निदेव विराजमान हैं॥ 23॥
 
That ten yojana wide peak is surrounded by flames of fire. The powerful Lord Agni himself resides there.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)