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mahabharat 12.327.18-19h: भगवान् के वचनों को सहन न कर पाने के कारण प्रह्लाद ने स्वयं ही शक्ति को उखाड़ने का संकल्प किया और उन्होंने शक्ति को पकड़कर खींचा, परन्तु वे उसे हिला भी न सके॥18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  12.327.18-19h 
सोऽमृष्यमाणस्तद्वाक्यं समुद्धरणनिश्चित:॥ १८॥
जग्राह तां तदा शक्तिं न चैनां स व्यकम्पयत्।
 
 
अनुवाद
भगवान् के वचनों को सहन न कर पाने के कारण प्रह्लाद ने स्वयं ही शक्ति को उखाड़ने का संकल्प किया और उन्होंने शक्ति को पकड़कर खींचा, परन्तु वे उसे हिला भी न सके॥18 1/2॥
 
Unable to bear the words of the Lord, Prahlada himself resolved to uproot the Shakti and he caught hold of the Shakti and pulled it, but he was unable to even move it. ॥18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)