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mahabharat 12.327.17-18h: उस शक्ति को झटककर प्रभु ने प्रह्लाद से कहा, "देखो, पुत्र में कितनी शक्ति है। यह कार्य कोई दूसरा नहीं कर सकता।" ॥17 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  12.327.17-18h 
तां कम्पयित्वा भगवान् प्रह्लादमिदमब्रवीत्॥ १७॥
पश्य वीर्यं कुमारस्य नैतदन्य: करिष्यति।
 
 
अनुवाद
उस शक्ति को झटककर प्रभु ने प्रह्लाद से कहा, "देखो, पुत्र में कितनी शक्ति है। यह कार्य कोई दूसरा नहीं कर सकता।" ॥17 1/2॥
 
Shaking off that power, the Lord said to Prahlada, "See how much power the son has. No one else can do this task." ॥17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)