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mahabharat 12.327.14-15h: तब उस आपत्ति को न सहते हुए शुद्धात्मा भगवान विष्णु ने अग्निकुमार स्कन्द की ओर देखा। तब उस समय उन पुरुषोत्तम ने उस जलती हुई शक्ति को अपने बाएँ हाथ से पकड़कर हिलाया। 14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  12.327.14-15h 
अनामृष्य तत: क्षेपमवैक्षत च पावकिम्।
सम्प्रगृह्य विशुद्धात्मा शक्तिं प्रज्वलितां तदा॥ १४॥
कम्पयामास सव्येन पाणिना पुरुषोत्तम:।
 
 
अनुवाद
तब उस आपत्ति को न सहते हुए शुद्धात्मा भगवान विष्णु ने अग्निकुमार स्कन्द की ओर देखा। तब उस समय उन पुरुषोत्तम ने उस जलती हुई शक्ति को अपने बाएँ हाथ से पकड़कर हिलाया। 14 1/2॥
 
Then, not tolerating that objection, pure soul Lord Vishnu looked towards Agnikumar Skanda. Then that Purushottam at that time held that burning power with his left hand and shook it. 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)