Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.326.49: हे महापुरुष! आपको अपने भाई-बंधुओं में कोई आसक्ति नहीं है, न ही आप भयंकर वस्तुओं से डरते हैं। मैं देखता हूँ कि आपके लिए मिट्टी के ढेले, पत्थर और सोना सब एक समान हैं। | mahabharat अध्याय 12.326: राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करते हुए ब्रह्मचर्याश्रममें परमात्माकी प्राप्ति होनेके बाद अन्य तीनों आश्रमोंकी अनावश्यकताका प्रतिपादन करना तथा मुक्त पुरुषके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न बन्धुष्वनुबन्धस्ते न भयेष्वस्ति ते भयम्।
पश्यामि त्वां महाभाग तुल्यलोष्टाश्मकाञ्चनम्॥ ४९॥
अनुवाद
हे महापुरुष! आपको अपने भाई-बंधुओं में कोई आसक्ति नहीं है, न ही आप भयंकर वस्तुओं से डरते हैं। मैं देखता हूँ कि आपके लिए मिट्टी के ढेले, पत्थर और सोना सब एक समान हैं।
O great one! You have no attachment to your brothers and relatives, nor are you afraid of fearful things. I see that for you lumps of clay, stones and gold are all the same.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥