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mahabharat 12.326.42: ब्रह्मर्षि! मैं आपको भली-भाँति जान गया हूँ। अपने पिता की कृपा और उनसे प्राप्त शिक्षा से आप सांसारिक सुखों से परे हो गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.326: राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करते हुए ब्रह्मचर्याश्रममें परमात्माकी प्राप्ति होनेके बाद अन्य तीनों आश्रमोंकी अनावश्यकताका प्रतिपादन करना तथा मुक्त पुरुषके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 326: राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करते हुए ब्रह्मचर्याश्रममें परमात्माकी प्राप्ति होनेके बाद अन्य तीनों आश्रमोंकी अनावश्यकताका प्रतिपादन करना तथा मुक्त पुरुषके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.326.42 
ब्रह्मर्षे विदितश्चासि विषयान्तमुपागत:।
गुरोस्तव प्रसादेन तव चैवोपशिक्षया॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षि! मैं आपको भली-भाँति जान गया हूँ। अपने पिता की कृपा और उनसे प्राप्त शिक्षा से आप सांसारिक सुखों से परे हो गए हैं।
 
Brahmarshi! I have come to know you very well. By the grace of your father and the education you have received from him, you have gone beyond worldly pleasures. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)