Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.326.41: हे ज्ञानियों में श्रेष्ठ शुकदेव जी! मैं आपमें उपर्युक्त सभी बातें देख सकता हूँ। इनके अतिरिक्त जो कुछ जानने योग्य है, उसे आप भली-भाँति जानते हैं। ॥41॥ | mahabharat अध्याय 12.326: राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करते हुए ब्रह्मचर्याश्रममें परमात्माकी प्राप्ति होनेके बाद अन्य तीनों आश्रमोंकी अनावश्यकताका प्रतिपादन करना तथा मुक्त पुरुषके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ज्ञानियों में श्रेष्ठ शुकदेव जी! मैं आपमें उपर्युक्त सभी बातें देख सकता हूँ। इनके अतिरिक्त जो कुछ जानने योग्य है, उसे आप भली-भाँति जानते हैं। ॥41॥
O Shukdev Ji, the best amongst the wise! I can see all the above mentioned things in you. Apart from these, whatever else is worth knowing, you know it well. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥