Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.326.34: जब मनुष्य मन, वाणी और कर्म से किसी भी प्राणी के प्रति पाप भावना नहीं रखता, अर्थात् समस्त प्राणियों के प्रति द्वेष से रहित हो जाता है, उस समय वह ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है ॥34॥ | mahabharat अध्याय 12.326: राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करते हुए ब्रह्मचर्याश्रममें परमात्माकी प्राप्ति होनेके बाद अन्य तीनों आश्रमोंकी अनावश्यकताका प्रतिपादन करना तथा मुक्त पुरुषके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब मनुष्य मन, वाणी और कर्म से किसी भी प्राणी के प्रति पाप भावना नहीं रखता, अर्थात् समस्त प्राणियों के प्रति द्वेष से रहित हो जाता है, उस समय वह ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है ॥34॥
When a man does not feel sinful towards any living being through his mind, speech and actions, that is, he becomes free from hatred towards all living beings, at that time he attains Brahmabhava. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥