Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.326.31: तात! इस विषय में राजा ययातिके द्वारा प्राचीन काल में गाये गए गीतों को सुनो, जिन्हें मोक्षशास्त्र को जानने वाले द्विज लोग सदैव स्मरण रखते हैं ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.326: राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करते हुए ब्रह्मचर्याश्रममें परमात्माकी प्राप्ति होनेके बाद अन्य तीनों आश्रमोंकी अनावश्यकताका प्रतिपादन करना तथा मुक्त पुरुषके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अत्र गाथा: पुरा गीता: शृणु राज्ञा ययातिना।
धार्यन्ते या द्विजैस्तात मोक्षशास्त्रविशारदै:॥ ३१॥
अनुवाद
तात! इस विषय में राजा ययातिके द्वारा प्राचीन काल में गाये गए गीतों को सुनो, जिन्हें मोक्षशास्त्र को जानने वाले द्विज लोग सदैव स्मरण रखते हैं ॥31॥
Tat! On this subject, listen to the songs sung by King Yayatike in ancient times, which the Dwijas who have knowledge of Mokshashastra always remember. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥