Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.326.30: जैसे पक्षी अपना घोंसला छोड़कर उड़ जाता है, वैसे ही वह इस शरीर से मुक्त हो जाता है और परलोक में निर्द्वंद्व एवं शांतिपूर्वक अक्षयपद (मोक्ष) को प्राप्त होता है ॥30॥ | mahabharat अध्याय 12.326: राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करते हुए ब्रह्मचर्याश्रममें परमात्माकी प्राप्ति होनेके बाद अन्य तीनों आश्रमोंकी अनावश्यकताका प्रतिपादन करना तथा मुक्त पुरुषके लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे पक्षी अपना घोंसला छोड़कर उड़ जाता है, वैसे ही वह इस शरीर से मुक्त हो जाता है और परलोक में निर्द्वंद्व एवं शांतिपूर्वक अक्षयपद (मोक्ष) को प्राप्त होता है ॥30॥
Like a bird leaving its nest and flying away, it becomes free from this body and attains Akshayapada (salvation) in the next world without conflict and peace. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥