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mahabharat 12.326.15-16: प्रभु! तप, गुरु की सेवा और ब्रह्मचर्य के पालन, इन तीन कर्तव्यों के साथ-साथ वेदों का अध्ययन भी पूर्ण करना चाहिए। देवताओं के लिए हवन और भोग अर्पण करके अपने पितृऋण से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। किसी के दोषों को न देखें और संयम से रहें। वेदों का अध्ययन पूर्ण करने के बाद गुरु को दक्षिणा दें और उनकी अनुमति लेकर समावर्तन संस्कार के बाद घर लौट आएं।   |   mahabharat अध्याय 12.326: राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करते हुए ब्रह्मचर्याश्रममें परमात्माकी प्राप्ति होनेके बाद अन्य तीनों आश्रमोंकी अनावश्यकताका प्रतिपादन करना तथा मुक्त पुरुषके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 326: राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करते हुए ब्रह्मचर्याश्रममें परमात्माकी प्राप्ति होनेके बाद अन्य तीनों आश्रमोंकी अनावश्यकताका प्रतिपादन करना तथा मुक्त पुरुषके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  12.326.15-16 
तपसा गुरुवृत्त्या च ब्रह्मचर्येण वा विभो।
देवतानां पितॄणां चाप्यनृणो ह्यनसूयक:॥ १५॥
वेदानधीत्य नियतो दक्षिणामपवर्ज्य च।
अभ्यनुज्ञामथ प्राप्य समावर्तेत वै द्विज:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! तप, गुरु की सेवा और ब्रह्मचर्य के पालन, इन तीन कर्तव्यों के साथ-साथ वेदों का अध्ययन भी पूर्ण करना चाहिए। देवताओं के लिए हवन और भोग अर्पण करके अपने पितृऋण से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। किसी के दोषों को न देखें और संयम से रहें। वेदों का अध्ययन पूर्ण करने के बाद गुरु को दक्षिणा दें और उनकी अनुमति लेकर समावर्तन संस्कार के बाद घर लौट आएं।
 
Lord! Along with these three duties, penance, service to the Guru and observance of celibacy, the work of studying the Vedas should be completed. He should try to free himself from the debt of his ancestors through Havankarma (sacrificing fire) to the gods and by offering offerings to the gods. Do not look at anyone's faults and live with restraint. After completing the study of the Vedas, give Dakshina to the Guru and take his permission and return home after the Samavartana Sanskaar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)