Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.325.9: सरलतापूर्वक यात्रा करनी चाहिए। मार्ग में सुख-सुविधा की खोज नहीं करनी चाहिए। विशिष्ट व्यक्तियों या स्थानों का अनुसंधान नहीं करना चाहिए; क्योंकि इससे उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आर्जवेणैव गन्तव्यं न सुखान्वेषिणा तथा।
नान्वेष्टव्या विशेषास्तु विशेषा हि प्रसङ्गिन:॥ ९॥
अनुवाद
सरलतापूर्वक यात्रा करनी चाहिए। मार्ग में सुख-सुविधा की खोज नहीं करनी चाहिए। विशिष्ट व्यक्तियों या स्थानों का अनुसंधान नहीं करना चाहिए; क्योंकि इससे उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है॥9॥
‘One should travel with simplicity. One should not look for comfort and convenience on the way. One should not research specific people or places; because this leads to attachment towards them.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥