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उक्तश्च मानुषेण त्वं पथा गच्छेत्यविस्मित:।
न प्रभावेण गन्तव्यमन्तरिक्षचरेण वै॥ ८॥
अनुवाद
जाते समय व्यास जी ने बिना किसी आश्चर्य के पुनः कहा - 'बेटा! तुम भी उसी मार्ग से यात्रा करो जिस मार्ग से सामान्य लोग जाते हैं। अपनी योगशक्ति का सहारा लेकर कभी भी वायु मार्ग से यात्रा मत करना।'
While leaving, Vyasa again said without any surprise - 'Son! You should also travel by the same route which ordinary people take. Never travel by the air route by taking the help of your yogic powers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥