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mahabharat 12.325.43-44: तदनन्तर जब रात्रि के दो पहर शेष रह गए, तब ब्रह्मवेला में वे पुनः उठे और स्नान-शौच आदि से निवृत्त होकर बुद्धिमान् शुकदेव पुनः भगवान् के ध्यान में मग्न हो गए। उस समय भी वे सुन्दर स्त्रियाँ उन्हें घेरे बैठी थीं। 43-44॥   |   mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना  »  श्लोक 43-44
 
 
श्लोक  12.325.43-44 
ततो मुहूर्तादुत्थाय कृत्वा शौचमनन्तरम्॥ ४३॥
स्त्रीभि: परिवृतो धीमान् ध्यानमेवान्वपद्यत॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जब रात्रि के दो पहर शेष रह गए, तब ब्रह्मवेला में वे पुनः उठे और स्नान-शौच आदि से निवृत्त होकर बुद्धिमान् शुकदेव पुनः भगवान् के ध्यान में मग्न हो गए। उस समय भी वे सुन्दर स्त्रियाँ उन्हें घेरे बैठी थीं। 43-44॥
 
Thereafter, when two hours of night were left, he woke up again in Brahmavela and after taking bath and toilet, the intelligent Shukdev again got engrossed in the meditation of God. Even at that time, those beautiful women were sitting around him. 43-44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)