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mahabharat 12.325.40-41h: उन सुन्दर स्त्रियों ने शुकदेवजी को शयन के लिए देवताओं के बैठने के योग्य, रत्नजटित तथा बहुमूल्य बिछौने से युक्त दिव्य शय्या दी।   |   mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  12.325.40-41h 
तस्मै शय्यासनं दिव्यं देवार्हं रत्नभूषितम्॥ ४०॥
स्पर्ध्यास्तरणसंकीर्णं ददुस्ता: परमस्त्रिय:।
 
 
अनुवाद
उन सुन्दर स्त्रियों ने शुकदेवजी को शयन के लिए देवताओं के बैठने के योग्य, रत्नजटित तथा बहुमूल्य बिछौने से युक्त दिव्य शय्या दी।
 
Those beautiful ladies gave a celestial bed, fit for the gods to sit on, studded with gems and spread with precious bedding, to Shukdev ji to sleep on. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)