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mahabharat 12.325.4: भरत! पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ शुक ने अपने पिता की आज्ञा से सम्पूर्ण योगशास्त्र और सम्पूर्ण सांख्य का अध्ययन किया ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.325.4 
पितुर्नियोगाज्जग्राह शुको धर्मभृतां वर:।
योगशास्त्रं च निखिलं कापिलं चैव भारत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भरत! पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ शुक ने अपने पिता की आज्ञा से सम्पूर्ण योगशास्त्र और सम्पूर्ण सांख्य का अध्ययन किया ॥4॥
 
Bhaarat! By the order of his father, Shuka, the best of the virtuous, studied the entire Yoga Shastra and the entire Sankhya. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)