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mahabharat 12.325.37-38h: हे भरतपुत्र! जब वे भोजन कर चुके, तब गणिकाएँ उन्हें अपने साथ अन्तःपुर के सुन्दर वन में ले गईं और वहाँ की प्रत्येक वस्तु उन्हें दिखाने लगीं। 37 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  12.325.37-38h 
तस्य भुक्तवतस्तात तदन्त:पुरकाननम्॥ ३७॥
सुरम्यं दर्शयामासुरेकैकश्येन भारत।
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! जब वे भोजन कर चुके, तब गणिकाएँ उन्हें अपने साथ अन्तःपुर के सुन्दर वन में ले गईं और वहाँ की प्रत्येक वस्तु उन्हें दिखाने लगीं। 37 1/2
 
O son of Bharat! When he had finished his meal, the courtesans took him along for a tour of the beautiful forest of the inner chambers and started showing him each and every object there. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)