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mahabharat 12.325.30-31h: थोड़ी देर बाद राजमंत्री हाथ जोड़कर वहाँ आये और उन्हें अपने साथ महल की तीसरी मंजिल पर ले गए।   |   mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  12.325.30-31h 
तं मुहूर्तादिवागम्य राज्ञो मन्त्री कृताञ्जलि:॥ ३०॥
प्रावेशयत् तत: कक्ष्यां तृतीयां राजवेश्मन:।
 
 
अनुवाद
थोड़ी देर बाद राजमंत्री हाथ जोड़कर वहाँ आये और उन्हें अपने साथ महल की तीसरी मंजिल पर ले गए।
 
After a short while the royal minister arrived there with folded hands and took him along with him to the third floor of the palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)