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mahabharat 12.325.22: इस प्रकार, समृद्ध लोगों से सेवित, विदेह देश को पार करते हुए, वह मिथिला के समृद्ध और सुंदर उद्यान में पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.325.22 
स विदेहानतिक्रम्य समृद्धजनसेवितान्।
मिथिलोपवनं रम्यमाससाद समृद्धिमत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार, समृद्ध लोगों से सेवित, विदेह देश को पार करते हुए, वह मिथिला के समृद्ध और सुंदर उद्यान में पहुँचे।
 
Thus, crossing the Videha country, served by prosperous people, he reached the prosperous and beautiful garden of Mithila.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)