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mahabharat 12.325.2: प्रभु! आप मोक्षमार्ग में कुशल हैं, अतः मुझे ऐसा उपदेश दीजिए, जिससे मेरे मन को परम शांति मिले।'   |   mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.325.2 
मोक्षधर्मेषु कुशलो भगवान् प्रब्रवीतु मे।
यथा मे मनस: शान्ति: परमा सम्भवेत् प्रभो॥ २॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! आप मोक्षमार्ग में कुशल हैं, अतः मुझे ऐसा उपदेश दीजिए, जिससे मेरे मन को परम शांति मिले।'
 
'Prabhu! You are skilled in the path of salvation; therefore, please give me such advice which will give ultimate peace to my mind.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)