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mahabharat 12.325.13-14: मार्ग में उन्हें अनेक पर्वत, नदियाँ, तीर्थ और सरोवर पार करने पड़े। उन्हें सर्पों और वन्य पशुओं से भरे हुए अनेक वनों से होकर गुजरना पड़ा। उन सबको पार करके वे क्रमशः मेरु (इलावृत) वर्ष, हरिवर्ष और हैमवत (किम्पुरुष) वर्ष पार करके भारतवर्ष पहुँचे॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  12.325.13-14 
स गिरींश्चाप्यतिक्रम्य नदीतीर्थसरांसि च।
बहुव्यालमृगाकीर्णा ह्यटवीश्च वनानि च॥ १३॥
मेरोर्हरेश्च द्वे वर्षे वर्षं हैमवतं तत:।
क्रमेणैवं व्यतिक्रम्य भारतं वर्षमासदत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में उन्हें अनेक पर्वत, नदियाँ, तीर्थ और सरोवर पार करने पड़े। उन्हें सर्पों और वन्य पशुओं से भरे हुए अनेक वनों से होकर गुजरना पड़ा। उन सबको पार करके वे क्रमशः मेरु (इलावृत) वर्ष, हरिवर्ष और हैमवत (किम्पुरुष) वर्ष पार करके भारतवर्ष पहुँचे॥13-14॥
 
On the way they had to cross many mountains, rivers, pilgrimage sites and lakes. They had to pass through many forests infested with snakes and wild animals. After crossing all of them, they crossed Meru (Ilavrita) year, Harivarsha and Haimavat (Kimpurusha) year respectively and reached Bharatvarsha.॥13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)