Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.325.1: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! शुकदेवजी मोक्ष का विचार करते हुए अपने पिता और गुरु व्यासजी के पास गए और विनयपूर्वक तथा कल्याण की इच्छा से उनके चरणों में प्रणाम करके उनसे इस प्रकार बोले -॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
स मोक्षमनुचिन्त्यैव शुक: पितरमभ्यगात्।
प्राहाभिवाद्य च गुरुं श्रेयोऽर्थी विनयान्वित:॥ १॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! शुकदेवजी मोक्ष का विचार करते हुए अपने पिता और गुरु व्यासजी के पास गए और विनयपूर्वक तथा कल्याण की इच्छा से उनके चरणों में प्रणाम करके उनसे इस प्रकार बोले -॥1॥
Bhishma says - Yudhishthir! Shukdev went to his father and Guru Vyasji thinking about salvation and bowing down to his feet with humility and with the desire of attaining welfare spoke to him in this manner -॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥