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mahabharat 12.324.9-10h: जब शुक्र के साथ-साथ अरणी का भी मंथन हुआ, तब महान तपस्वी और महायोगी, महामुनि शुकदेवजी का जन्म हुआ। वे अरणी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे।   |   mahabharat अध्याय 12.324: शुकदेवजीकी उत्पत्ति और उनके यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन एवं समावर्तन-संस्कारका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.324.9-10h 
शुक्रे निर्मथ्यमाने स शुको जज्ञे महातपा:॥ ९॥
परमर्षिर्महायोगी अरणीगर्भसम्भव:।
 
 
अनुवाद
जब शुक्र के साथ-साथ अरणी का भी मंथन हुआ, तब महान तपस्वी और महायोगी, महामुनि शुकदेवजी का जन्म हुआ। वे अरणी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे।
 
When Shukra was also churned along with Arani, a great ascetic and great Yogi, the great sage Shukdevji was born. He was born from the womb of Arani. 9 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)