Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.324.3-4: युधिष्ठिर! वन में उस अप्सरा को देखकर महर्षि भगवान व्यास सहसा काम से मोहित हो गए। महाराज! उस समय व्यास के हृदय को काम से उत्तेजित देखकर अप्सरा घृताची तोते का रूप धारण करके उनके पास आई। 3-4। | mahabharat अध्याय 12.324: शुकदेवजीकी उत्पत्ति और उनके यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन एवं समावर्तन-संस्कारका वृत्तान्त । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋषिरप्सरसं दृष्ट्वा सहसा काममोहित:।
अभवद् भगवान् व्यासो वने तस्मिन् युधिष्ठिर॥ ३॥
सा च दृष्ट्वा तदा व्यासं कामसंविग्नमानसम्।
शुकी भूत्वा महाराज घृताची समुपागमत्॥ ४॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! वन में उस अप्सरा को देखकर महर्षि भगवान व्यास सहसा काम से मोहित हो गए। महाराज! उस समय व्यास के हृदय को काम से उत्तेजित देखकर अप्सरा घृताची तोते का रूप धारण करके उनके पास आई। 3-4।
Yudhishthira! Seeing that Apsara in the forest, the sage Bhagwan Vyasa suddenly became infatuated with lust. Maharaj! Seeing Vyasa's heart agitated with lust at that time, the Apsara Ghritachi came to him in the form of a parrot. 3-4.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥