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mahabharat 12.324.23-24h: महाराज! वेद-वेदान्तों की विस्तृत व्याख्या करने में निपुण शुकदेवजी ने धर्म का विचार करके बृहस्पतिदेव को अपना गुरु बनाया। 23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.324: शुकदेवजीकी उत्पत्ति और उनके यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन एवं समावर्तन-संस्कारका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.324.23-24h 
बृहस्पतिं च वव्रे स वेदवेदाङ्गभाष्यवित्॥ २३॥
उपाध्यायं महाराज धर्ममेवानुचिन्तयन्।
 
 
अनुवाद
महाराज! वेद-वेदान्तों की विस्तृत व्याख्या करने में निपुण शुकदेवजी ने धर्म का विचार करके बृहस्पतिदेव को अपना गुरु बनाया। 23 1/2॥
 
Maharaj! Shukdevji, the expert in the detailed interpretation of the Vedas and Vedas, after thinking about religion, made Jupiter his guru. 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)