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mahabharat 12.324.22-23h: महाराज! शुकदेव जी के जन्म लेते ही सारे वेद अपने रहस्यों और संग्रहों सहित उनके सामने उसी प्रकार प्रकट हो गये, जैसे उनके पिता वेदव्यास के सामने प्रकट हुए थे।   |   mahabharat अध्याय 12.324: शुकदेवजीकी उत्पत्ति और उनके यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन एवं समावर्तन-संस्कारका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.324.22-23h 
उत्पन्नमात्रं तं वेदा: सरहस्या: ससंग्रहा:॥ २२॥
उपतस्थुर्महाराज यथास्य पितरं तथा।
 
 
अनुवाद
महाराज! शुकदेव जी के जन्म लेते ही सारे वेद अपने रहस्यों और संग्रहों सहित उनके सामने उसी प्रकार प्रकट हो गये, जैसे उनके पिता वेदव्यास के सामने प्रकट हुए थे।
 
Maharaj! As soon as Shukdev ji was born, all the Vedas along with their secrets and collections appeared before him in the same way as they appeared before his father Ved Vyas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)