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mahabharat 12.324.18-19h: तब महात्मा भगवान शंकर प्रसन्नतापूर्वक देवी पार्वती के साथ आये और महर्षि व्यास के नवजात पुत्र का संस्कार किया ॥18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.324: शुकदेवजीकी उत्पत्ति और उनके यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन एवं समावर्तन-संस्कारका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.324.18-19h 
तं महात्मा स्वयं प्रीत्या देव्या सह महाद्युति:॥ १८॥
जातमात्रं मुने: पुत्रं विधिनोपानयत् तदा।
 
 
अनुवाद
तब महात्मा भगवान शंकर प्रसन्नतापूर्वक देवी पार्वती के साथ आये और महर्षि व्यास के नवजात पुत्र का संस्कार किया ॥18 1/2॥
 
Then the great Mahatma Lord Shankar happily came with Goddess Parvati and performed the ritual rites of the newborn son of Maharishi Vyas. 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)