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mahabharat 12.324.14-16h: गंधर्व गाने लगे और अप्सराएँ नाचने लगीं। देवताओं की तुरहियाँ बहुत ज़ोर से बजने लगीं। विश्वावसु, तुम्बुरु, नारद, हाहा और हूहू आदि गंधर्व शुकदेवजी के जन्म पर बधाई गाने लगे। 14-15 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.324: शुकदेवजीकी उत्पत्ति और उनके यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन एवं समावर्तन-संस्कारका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.324.14-16h 
जेगीयन्ते स्म गन्धर्वा ननृतुश्चाप्सरोगणा:॥ १४॥
देवदुन्दुभयश्चैव प्रावाद्यन्त महास्वना:।
विश्वावसुश्च गन्धर्वस्तथा तुम्बुरुनारदौ॥ १५॥
हाहा हूहूश्च गन्धर्वौ तुष्टुवु: शुकसम्भवम्।
 
 
अनुवाद
गंधर्व गाने लगे और अप्सराएँ नाचने लगीं। देवताओं की तुरहियाँ बहुत ज़ोर से बजने लगीं। विश्वावसु, तुम्बुरु, नारद, हाहा और हूहू आदि गंधर्व शुकदेवजी के जन्म पर बधाई गाने लगे। 14-15 1/2
 
Gandharvas started singing and Apsaras started dancing. The trumpets of the gods rang very loudly. Gandharvas like Vishwavasu, Tumburu, Narad, Haha and Huhu started singing congratulations on the birth of Shukdevji. 14-15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)