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mahabharat 12.324.12-13h: हे जनेश्वर! उसी समय नदियों में श्रेष्ठ श्री गंगाजी अवतार लेकर मेरु पर्वत पर आईं और उन्होंने अपने जल से शुकदेवजी को तृप्त किया।   |   mahabharat अध्याय 12.324: शुकदेवजीकी उत्पत्ति और उनके यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन एवं समावर्तन-संस्कारका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.324.12-13h 
तं गङ्गा सरितां श्रेष्ठा मेरुपृष्ठे जनेश्वर॥ १२॥
स्वरूपिणी तदाभ्येत्य तर्पयामास वारिणा।
 
 
अनुवाद
हे जनेश्वर! उसी समय नदियों में श्रेष्ठ श्री गंगाजी अवतार लेकर मेरु पर्वत पर आईं और उन्होंने अपने जल से शुकदेवजी को तृप्त किया।
 
O Janeshwar! At that very moment, Shri Gangaji, the best of the rivers, came to Mount Meru in an incarnate form and satisfied Shukdevji with her water. 12 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)