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mahabharat 12.324.11-12h: कुरुनन्दन! पुण्यात्मा शुकदेवजी अपने पिता के समान उत्तम रूप और तेज वाले होकर निर्धूम अग्नि के समान प्रकाशित हो रहे थे। 11 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.324: शुकदेवजीकी उत्पत्ति और उनके यज्ञोपवीत, वेदाध्ययन एवं समावर्तन-संस्कारका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.324.11-12h 
बिभ्रत् पितुश्च कौरव्य रूपवर्णमनुत्तमम्॥ ११॥
बभौ तदा भावितात्मा विधूम इव पावक:।
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! पुण्यात्मा शुकदेवजी अपने पिता के समान उत्तम रूप और तेज वाले होकर निर्धूम अग्नि के समान प्रकाशित हो रहे थे। 11 1/2॥
 
Kurunandan! The holy soul Shukdev, having the same excellent form and radiance as his father, was glowing like smokeless fire. 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)