श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.323.8 
इन्द्रियाणां प्रसङ्गेन दोषमृच्छत्यसंशयम्।
संनियम्य तु तान्येव सिद्धिमाप्नोति मानव:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि मनुष्य अपनी इन्द्रियों की सांसारिक विषयों में आसक्ति के कारण ही दोषों को प्राप्त करता है और उन्हीं इन्द्रियों को वश में करके वह सफलता का भागी बनता है ॥8॥
 
There is no doubt that a man incurs faults due to his senses' attachment to worldly objects, and by controlling the same senses he becomes a part of success. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)