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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.323.5 
माहात्म्यमात्मयोगं च विज्ञानं च शुकस्य ह।
यथावदानुपूर्व्येण तन्मे ब्रूहि पितामह॥ ५॥
 
 
अनुवाद
पितामह! कृपया मुझे शुकदेवजी का माहात्म्य, आत्मयोग और विज्ञान यथार्थ रूप से बताइये।
 
Grandfather! Please tell me the greatness of Shukdevji, self-yoga and science in a precise manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)