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कथं च बालस्य सत: सूक्ष्मज्ञाने गता मति:।
यथा नान्यस्य लोकेऽस्मिन् द्वितीयस्येह कस्यचित्॥ ३॥
अनुवाद
शुकदेव जी तो बालक थे, फिर उनकी बुद्धि सूक्ष्म ज्ञान में कैसे प्रवृत्त हुई? ऐसी बुद्धि इस संसार में उनके अतिरिक्त अन्य किसी में नहीं देखी गई॥3॥
Shukdev Ji was still a child, how did his intellect get involved in subtle knowledge? Such intellect was not seen in anyone else except him in this world. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥