Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.323.29: वह भगवान् की भक्ति में लीन रहेगा, उसकी बुद्धि भगवान् में ही केन्द्रित रहेगी, उसका मन भगवान् में ही लगा रहेगा और वह भगवान् को ही अपना आश्रय मानेगा। उसके तेज से तीनों लोक व्याप्त हो जाएँगे और तुम्हारा पुत्र महान यश प्राप्त करेगा।॥29॥ | mahabharat अध्याय 12.323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तद्भावभावी तद्बुद्धिस्तदात्मा तदपाश्रय:।
तेजसाऽऽवृत्य लोकांस्त्रीन् यश: प्राप्स्यति ते सुत:॥ २९॥
अनुवाद
वह भगवान् की भक्ति में लीन रहेगा, उसकी बुद्धि भगवान् में ही केन्द्रित रहेगी, उसका मन भगवान् में ही लगा रहेगा और वह भगवान् को ही अपना आश्रय मानेगा। उसके तेज से तीनों लोक व्याप्त हो जाएँगे और तुम्हारा पुत्र महान यश प्राप्त करेगा।॥29॥
‘He will be immersed in the devotion of God, his intellect will be focused on God, his mind will be focused on God and he will consider God alone as his refuge. The three worlds will be pervaded by his brilliance and your son will achieve great fame.'॥ 29॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शुकोत्पत्तौ त्रयोविंशत्यधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३२३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शुकदेवकी उत्पत्तिविषयक तीन सौ तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३२३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥